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निपुण; बचपन के दिन; मैं पाँच से दस वर्ष की आयु तक:

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इस कार्यक्रम में निपुण मल्होत्रा जी से बातचीत की गई है जो विभिन्न कठिनाइयों को पार करते हुए देश और समाज के लिए विशेष उपलब्धियों को प्राप्त करने में सफल हुए। वह आज हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इन्होंने अपनी एक संस्था स्थापित की जो दिव्यांग लोगों की समस्याओं के लिए अनेक कार्यक्रम चलती है। इस भाग में निपुण मल्होत्रा के बचपन के पहले पाँच से दस सालों के बारे में बात की गई है।
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License:[Source CIET, NCERT ]Feb. 20, 2017, 11:48 a.m.
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